उत्तराखंड का इतिहास



उत्तराखंड का इतिहास
देवभूमि(देवताओं की भूमि)


उत्तराखंड का शाब्दिक अर्थ उत्तरी भूमि भाग का रूपांतरण हैं| इस नाम का उल्लेख ग्रन्थों मै मिलता हैं, जहाँ गढ़वाल को केदारखंड तथा कुमाऊँ को मानसखंड के नाम से उल्लेख हैं | उत्तराखंड राज्य क्षेत्र देवीशाक्तियों और धर्मस्थल क्रीड़ाभूमि मानी जाती हैं अतः उत्तराखंड को "देवभूमि उत्तराखंड " के नाम से भी जाना जाता हैं, उत्तराखंड में पारव,कुषाण ,गुप्त ,कत्यूरी, पाल, चंद व् पवांर राजवंश और अंग्रेजों ने बारी- बारी  से शासन किया था|
आधिकारिक तौर पर उत्तराखंड राज्य को पहले उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था, अर्थात भारत के उत्तरी हिस्से में एक राज्य। पूरे उत्तराखंड राज्य में बड़ी संख्या में तीर्थ केंद्रों और हिंदू मंदिरों के कारण इसे अमूमन देवभूमि (“देवताओं की भूमि”) के रूप में जाना जाता है| उत्तराखंड हिमालय, भाभार और तेराई के प्राकृतिक पर्यावरण के लिए जाना जाता है।
उत्तराखण्ड या उत्तराखंड भारत के उत्तर में स्थित एक राज्य है। 2000 और 2006 के बीच यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था, 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड भारत गणराज्य के 27 वें राज्य के रूप में वजूद में आया। राज्य का निर्माण कई वर्ष के आन्दोलन के पश्चात् हुआ। उत्तर प्रदेश से अलग किये गये नए प्रांत उत्तरांचल 8 नवम्बर 2000 को अस्तित्व में आया। उत्तराखंड राज्य अपनी भौगोलिक स्थिता, जलवायु, नैसर्गिक, प्राकृतिक दृश्यों एवं संसाधनों की प्रचुरता के कारण देश में मुख्य स्थान रखता है। उत्तराखंड राज्य पर्यटन और तीर्थ यात्रा की दृष्टि से विशेष महत्त्व रखता है। यहाँ चारों धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हैं।


पौराणिक इतिहास


पौराणिक ग्रन्थों में कुर्मांचल क्षेत्र मानसखण्ड के नाम से विद्यमान था। पौराणिक ग्रन्थों में उत्तरी हिमालय में सिद्ध, गन्धर्व, किन्नर, यक्ष जातियों की सृष्टि और इस सृष्टि का राजा कुबेर बताया गया हैं। कुबेर की राजधानी अलकापुरी (बद्रीनाथ से ऊपर) बतायी जाती है। पुराणों के अनुसार राजा कुबेर के राज्य में आश्रम में ऋषि-मुनि तप व साधना करते थे। अंग्रेज़ इतिहासकारों के अनुसार हूण, नाग,  खस, शक आदि जातियाँ भी हिमालय क्षेत्र में निवास करती थी। पौराणिक ग्रन्थों में मानस खण्ड व केदार खण्ड के नाम से इस क्षेत्र का उल्लेख है। इस क्षेत्र को तपोभूमि व देवभूमि माना गया है।

ऐतिहासिक विलोप के अनुसार केदार खण्ड कई गढ़ों (किले) में विभाजित था। इन गढ़ों के अलग-अलग राजा थे जिनका अपना-अपना शासन क्षेत्र था। इतिहासकारों के अनुसार पँवार वंश के राजा ने इन गढ़ों को अपने अधीन कर एकीकृत गढ़वाल राज्य की स्थापना की और श्रीनगर को अपनी राजधानी बनाया। केदार खण्ड का गढ़वाल नाम तभी प्रचलित हुआ।



उत्तराखंड की भाषा

उत्तराखंड में बोली जाने वाली कुमाऊँनी तथा गढ़वाली दो मुख्य क्षेत्रीय भाषाएँ हैं, लेकिन सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिन्दी है। कुमाऊँनी और गढ़वाली बोलियां, कुमाऊँ और गढ़वाल क्षेत्र में बोली जाती हैं। उत्तर और पश्चिम में कुछ आदिवासी समुदायों में भोटिया और जौनसारी बोलियां बोलते हैं। दूसरी ओर, शहरी आबादी में ज्यादातर हिंदी, जो संस्कृत के साथ साथ उत्तराखंड के एक आधिकारिक भाषा है|



Vibrant Uttarakhand

वाइब्रेंट उत्तराखंड "भगवान की भूमि" संस्कृति, मूल्यों, प्रेम, भक्ति, विरासत, अनुष्ठानों, जड़ों, विविधता को प्रदर्शित करने के बारे में है, जो देवभूमि उत्तराखंड को एकजुट करती है। हम "देवभूमि उत्तराखंड" से जुड़े मुख्य मुद्दों को भी दिखाने की कोशिश करेंगे और समय-समय पर व्यक्तिगत अनुभवों को भी पोस्ट करेंगे, जो उत्तराखंड पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हमारे पास उत्तराखंड में थे। साथ ही इस ब्लॉग का उद्देश्य नवोन्मेषी विचारों के युवाओं को बताना है जो उन्हें अपने भविष्य और अपने स्वयं के स्थानों पर अपना कैरियर बनाने में मदद करेंगे।

8 टिप्पणियाँ

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